1950 के दशक में, भारत की ऊर्जा आवश्यकताएँ तेजी से बढ़ रही थीं, और जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) जैसे कोयला और तेल पर निर्भरता..
Tiwari
February 27, 2025
भारत के त्रि-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम (India's Three-Stage Nuclear Programme) की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसकी पृष्ठभूमि (background) क्या थी?🔗
भारत का 3 चरणीय परमाणु कार्यक्रम क्या है1
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भारत के त्रि-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम की आवश्यकता के मुख्य कारण:
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): 1950 के दशक में, भारत की ऊर्जा आवश्यकताएँ तेजी से बढ़ रही थीं, और जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) जैसे कोयला और तेल पर निर्भरता चिंता का विषय था। परमाणु ऊर्जा को एक स्वच्छ और टिकाऊ विकल्प के रूप में देखा गया।
सीमित यूरेनियम भंडार (Limited Uranium Reserves): भारत में यूरेनियम के भंडार बहुत कम हैं (विश्व के भंडार का लगभग 1-2%), जो कि परमाणु ऊर्जा के लिए पारंपरिक ईंधन है।
प्रचुर थोरियम भंडार (Abundant Thorium Reserves): भारत के पास विश्व के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है (लगभग 25%)। थोरियम का सीधे परमाणु ऊर्जा के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे यूरेनियम-233 (U-233) में परिवर्तित किया जा सकता है, जो एक विखंडनीय पदार्थ (fissile material) है।
पृष्ठभूमि (Background):
डॉ. होमी जे. भाभा (Dr. Homi J. Bhabha) ने 1950 के दशक में इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की थी। उन्हें "भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक" माना जाता है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के थोरियम भंडारों का उपयोग करके दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता (long-term energy independence) प्राप्त करना था।
1954 में, परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy - DAE) की स्थापना की गई।
भारत के त्रि-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम के तीनों चरणों (stages) का विस्तृत वर्णन करें। प्रत्येक चरण में किस प्रकार के रिएक्टर, ईंधन और शीतलक (coolant) का उपयोग किया जाता है?🔗
चरण 1: दाबित भारी जल रिएक्टर (Pressurized Heavy Water Reactors - PHWRs)
उद्देश्य: बिजली उत्पादन और प्लूटोनियम-239 (Plutonium-239) का उत्पादन, जो दूसरे चरण के लिए ईंधन होगा।
रिएक्टर प्रकार: PHWR
ईंधन: प्राकृतिक यूरेनियम (Natural Uranium) जिसमें 0.7% यूरेनियम-235 (U-235) और शेष यूरेनियम-238 (U-238) होता है।
मंदक (Moderator) और शीतलक (Coolant): भारी जल (Heavy Water - D2O ड्यूटेरियम ऑक्साइड)
मंदक न्यूट्रॉन (neutrons) की गति को धीमा करता है, जिससे विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया (fission chain reaction) को बनाए रखने में मदद मिलती है।
उद्देश्य: पहले चरण में उत्पादित प्लूटोनियम-239 (Pu-239) का उपयोग करके अधिक विखंडनीय सामग्री (fissile material) का उत्पादन करना, जितना कि यह खपत करता है ("ब्रीडिंग")।
रिएक्टर प्रकार: FBR
ईंधन: प्लूटोनियम-239 (Pu-239) और यूरेनियम-238 (U-238) का मिश्रण (Mixed Oxide - MOX fuel)
मंदक (Moderator): इसमें मंदक की आवश्यकता नहीं होती।
शीतलक (Coolant): तरल सोडियम (Liquid Sodium)
उत्पाद (Byproduct): अधिक प्लूटोनियम-239 (Pu-239) और यूरेनियम-233 (U-233) (जब थोरियम-232 का उपयोग किया जाता है)।
वर्तमान स्थिती: तमिलनाडु के कलपक्कम (Kalpakkam) में एक प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (Prototype Fast Breeder Reactor - PFBR) निर्माणाधीन है।
चरण 3: थोरियम आधारित रिएक्टर (Thorium-Based Reactors)
उद्देश्य: भारत के प्रचुर थोरियम भंडार का उपयोग करके दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
रिएक्टर प्रकार: उन्नत भारी जल रिएक्टर (Advanced Heavy Water Reactor - AHWR) और अन्य थोरियम-आधारित रिएक्टर।
ईंधन: थोरियम-232 (Thorium-232) और यूरेनियम-233 (U-233) का मिश्रण।
थोरियम-232 स्वयं विखंडनीय नहीं है, लेकिन यह न्यूट्रॉन को अवशोषित करके यूरेनियम-233 में परिवर्तित हो जाता है।
मंदक (Moderator): भारी जल (AHWR में)
शीतलक (Coolant): भारी जल या हल्का जल (Light Water)
वर्तमान स्थिति: AHWR का विकास कार्य प्रगति पर है।
Stage 1 Pressurized Heavy Water Reactors
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Stage 2 Fast Breeder Reactors
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Stage 3 Advanced Heavy Water Reactors
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भारत के त्रि-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति (current status) क्या है?🔗
चरण 1: भारत में 24 रिएक्टर कार्यशील हैं, जिनकी कुल क्षमता 8180 मेगावाट है। इनमें से अधिकांश PHWR हैं।
चरण 2: कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का निर्माण कार्य पूरा होने वाला है।
चरण 3: उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR) सहित थोरियम-आधारित रिएक्टरों पर अनुसंधान और विकास (research and development) कार्य जारी है।
भारत के त्रि-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम की भविष्य की योजनाएँ (future plans) क्या हैं🔗
2032 तक 63 GW (गीगावाट) की परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य है, जिसमें PHWR और आयातित हल्के जल रिएक्टर (Light Water Reactors - LWRs) शामिल हैं।
2047 तक लगभग 100 GW की परमाणु क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (FBRs) की संख्या में वृद्धि करना।
थोरियम आधारित रिएक्टरों का विकास और तैनाती।
न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs) के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Venture) बनाकर परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विस्तार के लिए धन जुटाना।
Three Stages of Indias Nuclear Programme
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भारत का 3 चरणीय परमाणु कार्यक्रम क्या है
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Stage 2 FBRs
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Stage 3 Advanced Reactors
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